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त्वरित प्रतिक्रिया आवेश की पराकाष्ठा है |

Posted On: 30 Apr, 2013 Others में

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एक साधारण कथन है कि भीड़ कि कोई मनोदशा नहीं होती इसलिए जब भी एक साथ ढेर सारे लोग एक जगह इकट्ठे हो कर रैली या प्रदर्शन करते है तो उस समय उस भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ा काम होता है क्योंकि इस ढेर सारे एकत्र लोगो में से यदि कोई भी ऐसी अफवाह या बयानबाजी फैले जो सही न हो तो ऐसे में हादसे होने में जरा भी समय नहीं लगता कुछ ऐसा ही स्वभाव मनुष्य का भी है कि मनुष्य हर बात पर त्वरित प्रक्रिया देता है |आप में से कई लोगो ने उस नेवले की कहानी पढ़ी होगी जिसे एक किसान ने पाल रखा था मगर किसान की पत्नी उस नेवले को बिलकुल ही नापसंद करती थी | एक दिन अपने नवजात बच्चे को घर में सुला कर पति -पत्नी किसी काम से बाहर चले गए | उसी दौरान घर में बड़ा सांप आया नेवले ने बहुत देर तक उस सांप से लड़ाई की और उसे मार डाला , उसके बाद घर के मालिक के आने की आवाज सुन कर नेवला बाहर भागा-भागा आया सच , उसने तो बड़ी ही बहादुरी का काम किया था मगर किसान की पत्नी ने जब उस नेवले के मुंह में खून लगा देखा ! तो उसे लगा कि इसने मेरे बच्चे को मार दिया बिना कुछ भी सोचे समझे उसने पास पड़ा पत्थर उठाया और उस नेवले को मार दिया | उसके बाद जब दोनों घर के अंदर गए तो सामने उनका बेटा पालने में सो रहा था और पास में ही एक बड़ा सांप मरा पड़ा था अब सभी बाते उनके समझ में आ गयी कि नेवले ने उनके बच्चे की रक्षा के लिए उस सांप से लड़ाई की थी | पत्नी को बहुत पश्चाताप हुआ मगर अब क्या हो सकता था ? हममे से कितने ही लोग बिना सोचे समझे इसी तरह से तुरंत ही कोई निर्णय ले लेते है इस तरह की प्रतिक्रिया कई बातो पर आधारित होती है | एक हममे से कितने ही लोग बिना सोचे समझे किसी के बारे में एक राय बना लेते है कि अमुक व्यक्ति ,अमुक वर्ग , अमुक प्रान्त या किसी भी क्षेत्र को ले कर एक धारणा बना लेते है और तुरंत उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे देते है | हमारे मन -मस्तिष्क में बचपन से कुछ बाते ऐसे बैठ जाती है जैसे कि अगर हमें बचपन से ही किसी पशु या जीव जंतु के बारे में बताया जाये कि यह पशु खतरनाक होता है तो अचानक उस प्राणी के सामने आते ही हमारी प्रतिक्रिया यही होगी कि यह हमें नुकसान पहुंचाएगा और हम तुरंत उससे बचने के लिए उस पर हमला कर देते है इसी प्रकार किसी भी व्यक्ति या कैसी भी घटना के बारे में एक धारणा हमारे मन में बन जाती है इसे ( Negative Core Beliefs ) कहते है यह अवचेतन मन में हमारी मस्तिष्क में बैठी रहती है और परिस्थितियों के विपरीत होते ही अपने सुरक्षा को ले कर चिंतित मन तुरंत प्रतिक्रिया देता है | आप मे से कितने ही लोग इस बात को मानते होंगे की यदि कुछ भी अच्छी बात या अच्छा काम हो तो हम अपने को ले कर प्राउड फील करते है मगर जरा भी कुछ गलत होने पर एक स्वभाविक प्रवृत्ति है कि हम अपने को दूसरे से कमतर आँक लेते है और यही कारण है कि त्वरित प्रतिक्रिया जो होती है उसमे गुस्सा तथा आवेश ज्यादा होता है परिणामत: परिस्थितियाँ हमारे खिलाफ चली जाती है | एक नकारात्मक भाव जो हमारे अन्दर होता है वह कभी -कभी अनुवांशिक NURTURE(heredity) या फिर  NATURE(enviornment) के कारण हमारे अन्दर बैठ जाता है कभी – कभी हमारे स्वभाव में ही एक गुस्से कि भावना बैठी रहती है कभी -कभी हम जिस माहौल में पलते -बढ़ते है वहां भी गुस्सा या अशांति का ऐसा माहौल बना रहता है जिससे हमारे अन्दर नकारात्मकता कि भावना प्रबल रूप से आ जाती है और हम हर बात पर किसी दूसरे को दोष देना और उसे कठघरे में खड़ा करना सीख जाते है | अगर इन्ही प्रवृत्तियों पर हम लगाम लगाना सीख जाये तो शायद माहौल इतना ख़राब न हो और अपराध भी इतना न बढे कि हम सभी एक दूसरे पर दोषारोपण करने में अपना वक्त जाया करे |

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
May 1, 2013

मगर जरा भी कुछ गलत होने पर एक स्वभाविक प्रवृत्ति है कि हम अपने को दूसरे से कमतर आँक लेते है और यही कारण है कि त्वरित प्रतिक्रिया जो होती है उसमे गुस्सा तथा आवेश ज्यादा होता है परिणामत: परिस्थितियाँ हमारे खिलाफ चली जाती है | सही , ज्ञानवर्धक लेखन आदरणीय रचना वर्मा जी

jlsingh के द्वारा
May 1, 2013

बहुत ही सुन्दर उदाहरण के साथ आपने सार्थक बात कही है. आपका आभार!

    Rachna Varma के द्वारा
    May 1, 2013

    धन्यवाद सिंह जी |

ashokkumardubey के द्वारा
April 30, 2013

बिलकुल ठीक” बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताए” ये पुरानी कहावत कौन नहीं जानता? पर गुस्से में आदमी अँधा हो जाता है और कुछ भी गलत कर देता है क्रोध से ख़राब कोई ब्यवहार नहीं इसे हर किसी को छोड़ना चाहिए बहुत सी सामाजिक कुरीतियाँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी एक अच्छा लेख लिखने के लिए आपको बधाई

    Rachna Varma के द्वारा
    May 1, 2013

    आदरणीय अशोक जी , हमारी कहावतो में तो जीवन का सार छुपा हुआ है ,गुस्सा तो किसी भी समस्या का समाधान नहीं है |

nishamittal के द्वारा
April 30, 2013

हाँ बिन विचारे जो करे ……

    Rachna Varma के द्वारा
    May 1, 2013

    धन्यवाद निशा जी

bhagwanbabu के द्वारा
April 30, 2013

सही कहा आपने…. बिना विचारे जो करे.. सो पाछे पछताये… . सार्थक आलेख http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/04/27/%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/

    Rachna Varma के द्वारा
    May 1, 2013

    भगवान जी , बहुत सी बाते कही गयी लिखी गयी मगर न उन्हें कोई पढने वाला है न कोई समझने वाला हम लोग तो फटाफट युग में जी रहे है तभी तो युवा पीढ़ी रास्ता भटक रही है |


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