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"माँ तुझे प्रणाम "

Posted On: 11 May, 2013 Others में

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आज सोचिये तो किस तरह कि घटनाये हो रही है जिस बात को आपस में बैठ कर बातचीत करके सुलझाया जा सकता हो उसी बात को घर के बड़े ,बुजुर्ग ही इतना बड़ा बना देंगे कि अक्सर इस तरहhappy_mothers_day_2013_by_nudagimo-d5z0w7c के प्यार में नाकाम लोग कुछ भी कर गुजरते है दरअसल इस तरह की जो भी घटनाये होती है उसमे सारा दोष लडको के मनचलेपन को ले कर उन्हें ही दोषी ठहरा दिया जाता है जबकि इन सभी मामलो में पुरुषो से कही ज्यादा एक माँ इस तरह के मुद्दे को धैर्य पूर्वक समझा सकती है | जो भी लड़का किसी भी लड़की को चाहने लगता है उसे पाने के लिए किसी हद तक जाने को तैयार हो जाता है इसी से जुडी घटना को ले कर आज एक वाकया याद आया तो लगा एक माँ की महानता तथा समझदारी को याद करने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता माँ शब्द कितना विस्तृत , कितना विशाल भला एक दिन क्या सात जन्म भी कम पड़ जाये जब इतनी बड़ी शख्सियत के बारे में दो शब्द कहना पड़ जाये सच माँ ही वह ताकत है जिसके कारण आज इस दुनिया का वजूद कायम है घटना उस समय की है जब ग्रेजुएशन करने के लिए एक डिग्री कालेज में एडमिशन लिया , मेरे साथ ही जिस दूसरी लड़की ने उस कालेज में कदम रखा वह सुन्दर होने के साथ -साथ पढ़ने में भी बहुत अच्छी थी जल्दी ही हमारी दोस्ती भी हो गयी वह जितनी गम्भीर तथा कम बोलने वाली थी मै बिलकुल उसके विपरीत शायद यही एक वजह थी की दो विपरीत स्वभाव के लोगो में गहरी छनने लगी खैर जैसा कि होता है कालेज में पीछे भी लोग पड़ते भी थे एक लड़का तो उस दोस्त का ऐसा दीवाना कि सिर्फ घर पहुँचाने और ले आने कि जिम्मेदारी ही नहीं ऍन कालेज का एक्जाम चल रहा था बेचारी पढ़ाकू लड़की उसके सामने आ कर आशिक महोदय प्रणय -निवेदन करने लगे मेरी दोस्त को तो ‘ काटो तो खून नहीं ‘ बहुत गुस्साई बात यही तक नहीं रुकी हठधर्मिता तो देखिये आशिक महोदय पहुँच गए अपनी बड़ी बहन को ले कर उस लड़की के घर अपनी शादी कि बात करने के लिए ! मगर कहते है कि माँ तो माँ होती है अनुभव तथा धैर्य का भरपूर खजाना होता है उसके पास | न घर में भाइयो को खबर लगने दी न किसी रिश्तेदार को आराम से बैठा कर चाय ,नाश्ता करायी घर खानदान के बारे में पूछा जन्म ,गोत्र तथा और जो कुछ भी पूछ करके सामने से मना कर दिया कि बेटा , तुम्हारा और हमारा गोत्र तो एक ही है भला एक ही गोत्र में शादी कैसे हो सकती है ?

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
May 13, 2013

माँ शब्द कितना विस्तृत , कितना विशाल भला एक दिन क्या सात जन्म भी कम पड़ जाये जब इतनी बड़ी शख्सियत के बारे में दो शब्द कहना पड़ जाये सच माँ ही वह ताकत है जिसके कारण आज इस दुनिया का वजूद कायम है बहुत अच्छा लेख , आपका सुक्रिया ..

    Rachna Varma के द्वारा
    May 13, 2013

    धन्यवाद अमन जी

alkargupta1 के द्वारा
May 11, 2013

माँ ही अपनी संतान की सबसे अच्छी दोस्त , गुरु,. संरक्षक होती है जिसके आशीर्वचन और आशीषों के कवच उसको कदम-कदम पर सुरक्षा प्रदान करते हैं ….. अच्छा आलेख रचना जी

    Rachna Varma के द्वारा
    May 11, 2013

    अलका जी , माँ महानता का ही एक रूप होती है उसके बारे में क्या लिखा जा सकता है , प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 11, 2013

मैडम प्रणाम / माँ की महानता का कोई जबाब नहीं / मैंने भी ” माँ तुझे सलाम ” लिखा है आपकी प्रतिक्रिया चाहूँगा/ http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2013/05/09/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    Rachna Varma के द्वारा
    May 11, 2013

    राजेश जी नमस्कार अभी मैंने आपका लेख देखा और मैंने अपने लेख का शीर्षक बदल दिया ,प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद


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