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दरख्त की मजबूत छाँव

Posted On: 14 Jun, 2013 Others में

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जमीं का वज़ूद क्या होता ,गर आसमां सर पे न होता
सितारों भरी रात का आलम कैसे गुजरता
गर जमीं पर लेट उसे देखने का जूनून न होता
कितनी कहानियां अधूरी रहती कितनी ही दास्ताँ
जिन्दगी के फलसफे में गर जिक्र न हो उनका
आसमानों तक उड़ने का हुनर जिसने सिखाया
कुदरत ने उसे वालिद का दर्जा दिया
जरुरी तो एक बच्चे के लिए दोनों का रहना है
मगर पिता का होना तो सबसे अलग है
रोज की जिन्दगी में रंगो का ताना-बाना भरके
जीवन की पथरीली राहों पर चलने का सलीका
तूफानों से लड़ने का जो हौंसला भी दे
उसके लिए खास तो हर पल है
बेहद जरुरी है अपने जन्मदाता को याद करना
उन्ही की तरह मजबूत और उदार बनना
एक बेटी के लिए बहुत मायने रखते है पिता
हर पल ,हर क्षण हमारे ही करीब होते है
हमारे संस्कारो में भी उनकी ही झलक होती है
हमारी बातो में भी जिसका जिक्र होता है
दरख्त की वह मजबूत छांव
जिसके साए में एक सुकून का एहसास होता है

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
June 19, 2013

भावुक कर देने वाली कविता रचना जी….बधाई..

    Rachna Varma के द्वारा
    July 1, 2013

    धन्यवाद , सरिता जी |


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